चोदने की फिराक में


प्रेषक : दीपेश

दोस्तों में आज आप सभी को मेरे साथ हुई एक ऐसी घटना बताने जा रहा हूँ जिसको आज भी सोचकर मुझे उस चुदाई पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं होता है कि कभी मेरे साथ ऐसा भी हो सकता था? दोस्तों में अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पिछले करीब 1 साल से इसकी सभी कहानियों को पढ़ता आ रहा हूँ और एक दिन मैंने भी थोड़ी हिम्मत करके अपनी घटना को आप सभी के सामने लाने के बारे में सोचा। दोस्तों में उम्मीद करता हूँ कि इसको पढ़कर आप सभी को एक बार मज़ा जरुर आएगा। दोस्तों यह घटना उस रात को मेरी गर्लफ्रेंड की जमकर चुदाई करने के बाद मेरे साथ घटित हुई। मैंने उस रात अपनी गर्लफ्रेंड को उसके घर पर बहुत रात तक बहुत बार चोदा और उसके बाद हम दोनों एक दूसरे को अपनी बाहों में लेकर लेट गए और हमें पता ही नहीं चला कि कब हमे नींद आ गई और उसके बाद मेरे साथ ऐसा क्या हुआ? अब में उस घटना को थोड़ा विस्तार से सुनाता हूँ।

दोस्तों हमारे घर के बिल्कुल पास में मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त राजु का घर है और उसकी उम्र 20 साल है, जहाँ पर वो, उसकी दीदी दीपिका (उम्र 23 साल) और उसकी माँ हीना (उम्र 47 साल) रहते है। दोस्तों हम दोनों दोस्त बहुत पुराने दोस्त है इसलिए हम दोनों का हमेशा एक दूसरे के घर पर आना जाना लगा रहता था, लेकिन में तो उसकी दीदी को लाईन मारने वहां पर जाया करता था और मेरी उसकी दीदी से भी बहुत अच्छी बातचीत भी थी और में हमेशा से उन्हे एक बार चोदने की फिराक़ में था और में कभी कभी मौका देखकर उन्हें छूना और हंसी मजाक में खुलकर बात किया करता था, जिसका मतलब वो अधिकतर समय समझ जाया करती थी, लेकिन हमारे बीच उससे ज़्यादा कुछ नहीं हो पाया। दोस्तों हम कभी कभी फिल्म देखने या बाहर घूमने जरुर साथ में जाया करते थे।

एक दिन ऐसे ही हमारा बाहर जाकर फिल्म देखने का एक प्लान बना, लेकिन राजु कुछ काम की वजह से नहीं आ सका तो बस हम दोनों ही फिल्म देखने चले गये। हम एक डरावनी फिल्म देखने गए, वैसे वो ज़्यादा डरावनी तो नहीं थी, लेकिन फिर भी दीपिका ने फिल्म देखते देखते अचानक से एक डरावने सीन को देखकर मुझे कसकर अपनी बाहों में ले लिया था। फिर मैंने भी एक अच्छा मौका समझकर और अपने आसपास किसी के ना होने का फायदा उठाकर उसकी जांघ पर अपना एक हाथ रख दिया और फिर में हल्का हल्का सहलाने लगा।

अब वो कुछ देर बाद अपना पूरा ध्यान मेरी तरफ लगाकर मेरी तरफ देखकर मुस्कुराने और मैंने अपना उसकी जांघो को सहलाना लगातार जारी रखा, लेकिन उसने मेरा बिल्कुल भी विरोध नहीं किया और फिर मैंने थोड़ा और आगे बढ़ते हुए अपने एक हाथ को उसके कंधे के ऊपर से उसके बूब्स तक पहुंचाकर अब में उसके बूब्स को भी सहलाने लगा। मैंने उसको उस फिल्म के दौरान पूरी तरह से गरम कर दिया और फिर फिल्म खत्म होने के बाद वापस घर जाते वक़्त हम बस में चड़े, लेकिन उसमे बहुत भीड़ थी।

दोस्तों जैसा कि आप सबको पता है कि मुंबई की बस और ट्रेन में भीड़ की वजह से क्या हाल होता है? तो मैंने सोचा कि क्यों ना मुझे भी इस बात का फायदा उठाना चाहिए तो में उसके पीछे खड़ा रहा और अब में उसकी गांड को छूने लगा, कुछ ही देर में मेरा पूरा लंड उसकी गांड की गरमी पाकर तनकर खड़ा हो गया जो में उसकी गांड पर घुसा रहा था और वो बस मुस्कुराकर मेरे लंड के मज़े ले रही थी। फिर कुछ देर बाद हमारा स्टॉप आ गया तो हम लोग घर पर आ गए, लेकिन उसने मुझे कुछ भी नहीं कहा वो बस मुझे एक प्यारी सी मुस्कान देकर अंदर चली गई।

फिर दूसरे दिन तकिए से मस्ती करने के दौरान में अब उसके बूब्स दबा रहा था और वो मेरा पूरा पूरा साथ दे रही थी, लेकिन उसके बाद कुछ दिनों तक हमे कोई भी ऐसा मौका नहीं मिला जिसका हम पूरी तरह फायदा उठा सकते। फिर एक दिन सुबह में राजु को बुलाने उसके घर पर गया तो आंटी ने दरवाज़ा खोला और मुझे यह बताया कि वो सोया हुआ है और मुझसे कहा कि वो अपने रूम में है तू जाकर उसे उठा ले। फिर में अंदर गया तो मैंने देखा कि राजु और उसकी सेक्सी बहन दीपिका दोनों ही वहां पर सोए हुए थे। अब मेरे अंदर का शैतान उसका वो कम कपड़ो से लिपटा हुआ गोरा सेक्सी बदन देखकर जाग गया और मैंने बिना कुछ सोचे समझे दीपिका के बूब्स दबाना शुरू किया और में उसकी टी-शर्ट को उतारने की कोशिश करने लगा, लेकिन तभी वो हड़बड़ाकर नींद से उठ गई और अचानक उसे अपने सामने देखकर मैंने सोचा कि अब में गया काम से, लेकिन मेरे ऊपर भड़कने की जगह वो मुझसे बोली कि यह इन कामों के लिए बिल्कुल भी सही समय नहीं है।

दोस्तों अब तो उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। उस दिन के बाद तो में बस कोई ना कोई बहाने ढूंढता रहता था उसे किस करने के, उसके बूब्स को दबाने के, लेकिन फिर एक दिन आंटी ने मुझसे कहा कि उन्हे किसी काम से शहर से बाहर जाना है। उनके मुहं से यह बात सुनकर मेरे तो मन में लड्डू फूटने लगे, वैसे आंटी हर महीने बाहर जाती थी क्योंकि वो सरकारी नौकरी करती है जिसकी वजह से उनको बाहर ट्रेनिग पर जाना पड़ता था। फिर उस दिन मैंने मन ही मन सोच लिया कि आज तो बस मुझे अपनी सपनों की रानी के साथ सेक्स जरुर करना है, लेकिन हमारे साथ दिक्कत यह थी कि हम राजु का क्या करेंगे? तो हमने सोच लिया कि हम देर रात को जब राजु सो जाएगा उसके बाद सेक्स करेंगे और फिर मैंने अपने पर कह दिया कि आज रात को में हीना आंटी के यहाँ पर रूकूंगा।

अब हम थोड़ा समय टीवी देखने के बाद सोने चले गये, राजु और दीदी का एक ही रूम था इसलिए हम तीनों वहीं पर सो गए, लेकिन मुझे अब कहाँ नींद आने वाली थी। में तो बस अपनी आखें बंद करके दीपिका की चुदाई के सपने देखने लगा और राजु के सोने के बाद मैंने दीदी को उठाया और फिर हम दूसरे रूम में चले गये। फिर रूम में अंदर जाते ही दीपिका मुझ पर भूखी लोमड़ी की तरह टूट पड़ी। वो मुझे किस करने लगी और हम एक दूसरे के होंठो को चूसने लगे, में उसकी जीभ को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा।

अब वो बस उस समय नाईट गाऊन में थी जो मैंने कुछ देर बाद चूमते चाटते समय सही मौका देखकर उतार दिया था और अब में उसके बूब्स से खेलने लगा और मेरी केफ्री के ऊपर से मेरा तनकर खड़ा लंड साफ साफ नज़र आ रहा था जो अब बाहर आने की कोशिश कर रहा था और वो उस पर अपनी गरम चूत को रगड़ने लगी। फिर मैंने खुद ही अपनी केफ्री को उतार दिया और उसने मेरा लंड पकड़कर ज़ोर से दबा दिया और अब उसे धीरे धीरे सहलाने लगी। फिर में भी अब उसके निप्पल को काटने दबाने लगा और फिर मैंने उसे बेड पर लेटा दिया और अब में उसकी चूत को चाटने लगा और मैंने अपनी एक उंगली को उसकी चूत में डाल दिया। अब वो एकदम से मचल गई और तभी उसने मुझसे कहा कि प्लीज थोड़ा धीरे धीरे करो और उसने मुझे बताया कि यह उसका आज किसी लड़के के साथ पहला सेक्स है, लेकिन उसने उससे पहले उसकी एक दोस्त के साथ मिलकर बहुत बार अपनी चूत को एक रबर के लंड से चोदकर संतुष्ट किया था।

दोस्तों अब उसके मुहं से यह बात सुनकर मुझे और भी जोश आ गया कि इस चूत को चोदने वाला में पहला मर्द हूँ और मैंने जोश ही जोश में उसकी चूत में अपनी जीभ को डाल दिया और वो बस अब सिसकियाँ लेती रही और मेरी जीभ से अपनी चूत को मुझसे चुदवाती रही। फिर उसने कुछ देर बाद मुझसे लंड को अंदर डालने के लिए और मैंने उसको अपना लंड चूसने के लिए कहा तो वो मना करने लगी में उसके साथ ज्यादा जबरदस्ती नहीं करना चाहता था इसलिए मैंने अपने लंड को चूत के मुहं पर रख दिया और एक ज़ोर का धक्का दिया, लेकिन मेरा लंड अंदर नहीं गया तो उसने खुद मेरे लंड को एक हाथ से चूत के मुहं पर पकड़कर रखा और फिर मुझसे कहा कि में कितना भी ज़ोर से चिल्लाऊँ या चीखूँ, लेकिन फिर भी तुम मत रुकना और पूरा लंड डाल देना। दोस्तों ये कहानी आप अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

दोस्तों वैसे भी में नहीं रुकने वाला था क्योंकि मुझे आज उसको चोदने का बहुत अच्छा मौका हाथ लगा था और फिर भला में उसको कैसे अपने हाथ से जाने देता? तो मैंने एक ज़ोर कस धक्का लगाया और मेरा सुपाड़ा अंदर जाते ही वो मचलने लगी और ज़ोर ज़ोर से चीखने, चिल्लाने लगी, लेकिन में नहीं रुका। अब मैंने एक और धक्का लगाया तो आधा लंड अंदर चला गया। फिर में उसके बूब्स को दबाने लगा और होंठ पर होंठ रखकर पूरा अंदर डाल दिया। कुछ देर बाद वो शांत हुई और वो मुझसे तेज़ी से चोदने के लिए बोलने लगी। थोड़ा चोदने के बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था तो उसने मुझसे अपना वीर्य बाहर निकालने को कहा और मैंने अपना लंड बाहर निकालकर उसके बूब्स पर ही पूरा वीर्य निकाल दिया और अब हम कुछ देर वैसे ही लेटे रहे। फिर उसने मुझसे एक और बार चुदाई करने के लिए कहा और इस बार वो घोड़ी बन गई तो मैंने अपना लंड उसकी गांड पर रख दिया तो वो हटाने लगी और मेरे बहुत मनाने पर भी वो नहीं मानी और बोली कि प्लीज मेरी गांड में मत डालना में उसका दर्द नहीं सह सकती।
फिर मैंने उसको विश्वास दिलाया कि में उसकी चूत में ही डालूँगा, लेकिन पीछे से और फिर मैंने लंड को चूत के मुहं पर रखकर ज़ोर से धक्का देकर एक ही बार में पूरा अंदर डाल दिया। वो बहुत ज़ोर से चिल्लाई और मुझे गालियां देने लगी कि बहनचोद, कुत्ते, मादरचोद क्या ऐसे चोदता है? थोड़ा धीरे नहीं चोद सकता क्या? में कहीं भागी जा रही हूँ या में तुझसे इसके बाद कभी नहीं चुदुंगी, चल अब थोड़ा आराम से चोद, लेकिन में तो बिना रुके उसे लगातार ताबड़तोड़ धक्के देकर चोदता रहा और फिर थोड़े समय बाद हम दोनों ने एक साथ में अपना अपना पानी छोड़ा और इसी तरह और एक बार चुदाई करके सो गये।

दोस्तों दूसरे दिन सुबह सुबह करीब सात बजे किसी ने मेरे लंड को सहलाया उस बात का अहसास मुझे थोड़ी देर बाद हुआ क्योंकि में उस रात को बहुत बार चुदाई करके थक चुका था और में गहरी नींद में होने की वजह से कुछ देर उस काम को अपना एक सपना या फिर मेरी गर्लफ्रेंड दीपिका का काम समझकर जानबूझकर अपनी दोनों आखें बंद करके लेटा रहा और फिर कुछ देर बाद मुझे पूरा पूरा विश्वास हो गया कि यह काम जरुर दीपिका का ही है, शायद उसकी चूत को सुबह सुबह मेरे लंड की फिर से एक बार जरूरत महसूस होने लगी है और वो अपनी चूत को मेरे लंड से चुदाई करवाकर अपनी चूत को एक बार फिर से शांत करना चाहती है, अपनी चूत की खुजली एक बार फिर से मुझसे मिटवाना चाहती है। अब में यह बात मन ही मन सोचता रहा और उसके मेरे लंड को सहलाने का मजा लेता रहा।

फिर जब मुझे किसी के हाथ का अपने लंड पर सही में होने का अहसास हुआ तो फिर में एकदम से हड़बड़ाकर उठ गया, लेकिन जब मैंने उठकर देखा और में वो सब देखकर तो बिल्कुल ही दंग रह गया था, क्योंकि वो दीपिका नहीं बल्कि मेरा दोस्त राजु था और दीपिका मेरे पास में नंगी ही सोई हुई थी। हमें रात को बिल्कुल भी याद नहीं रहा कि हमारे पास वाले दूसरे रूम में राजु भी है। फिर मुझे अपनी आखों पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हो रहा था कि में सुबह सुबह यह सब क्या देख रहा हूँ और मेरा दोस्त यहाँ पर कैसे आया? वो मेरे लंड को ऐसे क्यों हिला रहा है? मेरे दिमाग में बहुत सारे सवाल आ रहे थे जिनको में खुद ही अपने आप से किए जा रहा था। अब मैंने उसे तुरंत अपने ऊपर से धक्का देकर हटाया तो वो गरम होकर मुझ पर भड़क गया और उसकी चिल्लाने की आवाज़ सुनकर अब दीपिका भी जाग गई और वो उस पर भी चिल्लाने लगा। दोस्तों आप ये कहानी अन्तर्वासना – स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।

फिर मैंने और दीपिका ने उसे बहुत देर तक हर तरह से समझाकर देखा, लेकिन वो हमारी एक भी बात को नहीं माना और हम दोनों पर लगातार चिल्लाता रहा और हमे गालियाँ सुनाता रहा और हमारी कोई भी बात सुनने को वो बिल्कुल भी तैयार नहीं था। फिर इस वजह से हम दोनों का मुहं उतरा हुआ था और हमे बहुत ज्यादा चिंता हो रही थी कि यह ना जाने किसको क्या कहेगा? तभी दीपिका ने कुछ देर बाद ना जाने क्या बात सोचकर उससे कहा कि अगर वो भी चाहे तो हमारे साथ मिलकर रह सकता है? और अब उसने दीपिका को गुस्से में आकर डांटकर चुप करके कमरे से बाहर भेज दिया। दोस्तों अब में उसका अपनी बड़ी बहन से साथ ऐसा व्यहवार देखकर बहुत डर गया था। में मन ही मन सोचने लगा कि जब यह इतने गुस्से में अपनी बहन को रूम से बाहर कर सकता है तो इसका मतलब यह है कि यह आज हम दोनों को छोड़ेगा नहीं और ना ही हमारी कोई बात सुनेगा, लेकिन तभी उसने दीपिका के बाहर जाते ही उसने मुझसे बहुत प्यार से कहा कि जो तू कल रात को दीदी के साथ कर रहा था, प्लीज वो सब कुछ अब मेरे साथ भी कर।

दोस्तों में उसके मुहं से यह बात सुनकर एकदम आश्चर्यचकित हो गया था और मुझे उसके मुहं से कहे उन शब्दों पर और मेरे कानों से सुनी उस बात पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं हुआ। में कुछ देर तक सोचने लगा और उसने मुझे पकड़कर हिलाया और मुझे होश आ गया, लेकिन अब मेरे पास और कोई रास्ता भी नहीं था तो में उसकी बात मान गया और अब वो नीचे बैठकर मेरा लंड चूसने लगा। फिर उसने मेरा लंड चूस चूसकर पूरा खड़ा कर दिया और फिर वो मेरे सामने घोड़ी बनकर मेरे लंड को उसकी गांड के अंदर डालने की बात कहने लगा और फिर मैंने भी उसकी गांड पर अपने लंड का सुपड़ा रखकर एक ज़ोर का धक्का दे दिया तो मैंने महसूस किया कि मेरा लंड बहुत आसानी से उनकी गांड में पूरा का पूरा अंदर चला गया और में समझ गया कि इसका मतलब वो इससे पहले भी अपनी गांड किसी और से भी मरवा चुका था। अब में उसकी गांड में ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर मार रहा था और वो मज़े से चिल्ला रहा था। उसकी चिल्लाने की आवाज़े सुनकर दीपिका भी वहां पर आ गई, लेकिन वो दूर दरवाज़े पर खड़े होकर मुस्कुराने लगी और मुझे अपने भाई की गांड में लंड डालकर धक्के देते हुए देखकर वो मन ही मन खुश हो रही थी।

फिर मैंने उसे इशारे से अंदर बुलाया और फिर में उसको किस करने लगा उसके बूब्स को दबाने लगा और दूसरी तरफ उसके भाई को चोद रहा था। दोस्तों में मजबूरी में उसकी गांड मार रहा था, लेकिन दीपिका के मेरे पास होने की वजह से मुझे उसकी गांड मारने में अब थोड़ा मज़ा आने लगा था। में लगातार ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर उसकी गांड मारता रहा। अब थोड़ी देर के बाद मेरा वीर्य निकलने वाला था तो मैंने उसकी गांड में ही अपना वीर्य छोड़ दिया। फिर उसके बाद उसने मेरा लंड चूसकर चाटकर साफ किया और उसने दीपिका को भी मेरा लंड चूसने को कहा, लेकिन उसने साफ मना कर दिया तो राजु ने ज़बरदस्ती उसका मुहं पकड़ा और मैंने उसके मुहं में अपना खड़ा लंड डाल दिया और वो मेरे लंड को लोलीपोप की तरह चूसने लगी और उसने मेरा लंड पूरा साफ कर दिया और उसके बाद हम तीनों वहीं पर फिर सो गये।।

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