पति के भाई से चुदवाकर शादी कर ली


प्रेषिका : अर्पिता

मैं अर्पिता हूँ. मेरी उम्र २२ साल, रंग गोरा-चिठ्ठा, शारीर एकदम स्लिम है. मेरी शादी डेढ़ साल पहले चन्दन के साथ हूई है. चन्दन की उम्र २५ साल की थी. चन्दन के अलावा घर पर कोई नहीं रहता. मैं सेक्स में बहुत रुची रखती हूँ. मैंने अपनी लाइफ के बारे में जो ख्वाब देखे थे वो सभी ख्वाब चन्दन से शादी करने के बाद टूट गए. चन्दन का लंड (पेनिस) बहुत ही छोटा था और उस से मेरी भूख शांत नहीं होती थी. शादी के बाद जब मैं ससुराल पहुची तो मैंने देखा की एक आदमी एकदम नंगा ही पागलों की तरह हमारे घर के आस पास चक्कर लगता रहता था. दीखने में वो गठीले बदन का सुंदर नौजवान था औरकीसी अच्छे परीवार का लगता था. उसकी उम्र लगभग २६-२७ साल की रही होगी. मैंने चन्दन से उस पागल के बारे में पूछा तो वो बोले ये तो बहुत दिनों से यहीं आस पास ही घूमता रहता है. मेरे घर के आस पास बहुत सरे जंगली पेड और पौधे थे जीस से कोई भी आदमी गेट के बाहर से हमारे घर को आसानी से नहीं देख सकता था. वो जबहमारे घर के आस पास होता तो मैं हमेशा छुप छुप कर उसके लंड (पेनिस)को देखती रहती थी क्यों की उसका लंड (पेनिस) ढीला रहने पर भी लगभग ८” लम्बा और बहुत ही मोटा था. मैंने सोचा की काश एक बार मैं उसके लंड (पेनिस) को अपने हाथो से पकड़ कर देख सकती. मैं हमेशा सोचा करतीथी की काश चन्दन का लंड (पेनिस) भी लम्बा और मोटा होता क्यों की चन्दन कालंड (पेनिस) लगभग ४” लम्बा और बहुत ही पतला था. आप लोग यह कहानी अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मुझे उनसे चुदवाने में बिल्कुल भी मज़ा नहीं आता था. वो पागल रात को हमारे कम्पौंड मेंआ जता था और पूरी रात घर के मैं दरवाज़े के पास बैठा रहता था.ये उन दिनों की बात है जब चन्दन १५ दिनों के लीये चेन्नई चले गए.उनके जाने के दुसरे दीन रात के ८ बजे के आस पास वो पागल हमारे घर के दरवाजे के पास आ कर बैठ गया. जब वो रात को आ कर बैठजता तो वो फीर सुबह ही वहाँ से वापस जता था. मैंने सोचा आज उससे कुछ बात करके देखती हूँ. मैंने डरते हुये दरवाज़ा खोला और उससे पूछा खाना खाओगे. उस ने अपना सीर हाँ में हीला दीया. मैं खाना ले आयी और जब वो खाना खा चूका तो उसने इशारे से पानीमाँगा. मैंने उसे पानी लाकर दीया. पानी पीने के बाद वो चुप चापबैठा रह.मौका अच्छा था मैं उसके बगल में बैठ गयी. मैं तो उसके लंड (पेनिस)को अपने हाथ में लेकर देखना चाहती थी. मैं ये भी देखना चाहती थी की उसका लंड (पेनिस) खड़ा होने के बाद कीतना लम्बा और मोटा हो जता है.मैंने अपना हाथ उसके जांघों पर रख दिया. वो कुछ नहीं बोला तोमैं अपना हाथ उसके जांघ पर फीराने लगी. वो फीर भी कुछ नहींबोला तो मैंने अपना हाथ धीरे धीरे उसके लंड (पेनिस) की तरफ बढ़ा दीया. वो फीर भी कुछ नहीं बोला. अब मेरी उंगलियाँ उसके लंड (पेनिस) को touch कररही थी. मेरे बदन में सुरसुरी सी होने लगी तो मैंने अपनी ऊँगलीउसके लंड (पेनिस) पर फीरनी शुरू कर दी. जब वो फीर भी कुछ नहीं बोलातो मैंने अपने हाथों से उसके लंड (पेनिस) को पकड़ लीया. मैं धीरे धीरे उसका लंड (पेनिस) सहलाने लगी तो वो मुझे घूर घूर कर देखने लगा. उसकीआंखों में भी सेक्स की प्यास एक दम साफ दीख रही थी.थोड़ी ही देर में उसका लंड (पेनिस) खड़ा होने लगा. उसका लंड (पेनिस) टाइट होने केबाद लगभग १०” लम्बा और बहुत ही ज्यादा मोटा हो गया. मैं उसके लंड (पेनिस) के साइज़ को देखकर जोश के मारे पागल सी होने लगी और थोड़ी ही देरमें मेरी चुत एक दम गीली हो गयी. मुझे अब गलत या सही का कोईहोश नहीं रह गया था. मैंने सोचा अगर मैं इस पागल से चुदवा लूंतो मुझे कोई कुछ भी नहीं कह सकेगा. अगर मुझसे कोई कुछ कहेगा तो कह दूँगी की इस पागल ने मेरे साथ जबरदस्ती कीया है.मैंने सोच लीया की आज मैं इस पागल से चुदवा कर रहूंगी भले ही मेरी चुत का हाल कुछ भी हो.मैं उस पागल का हाथ पकड़ कर घर के अन्दर ले गयी. उसे देख करलग रह था जैसे उसने कभी नहाया ही ना हो. मैं उसे बाथरूम में ले गयी और उसे एक साबुन देते हुये नहाने को कहा. मैं खडी रही औरवो नहाने लगा. जोश के मारे मेरी चुत फीर से गीली होने लगी. नहानेके बाद उसका गोरा बदन एक दम नीखर आया. उसका लंड (पेनिस) भी बहुत गोराथा. जब वो नहा चूका तो मैं उसे बेडरूम में ले गयी. मैंने उसे बेड पर बिठा दिया. वो कुछ भी नहीं बोल रह था. मैंने पूछा तुमगूंगे हो क्या तो उसने अपना सीर हाँ में हीला दिया. मैंने सोचा की येतो और अच्छी बात है की ये गूंगा है और कीसी से कुछ भी नहींकहेगा. मैं बेड पर उसके बगल में बैठ गयी. मैंने उसके लंड (पेनिस) को फीर से सहलाना शुरू कर दिया तो थोड़ी ही देर में उसका लंड (पेनिस) खड़ा होकर एक दम टाइट हो गया.मैंने सोचा ये तो पागल है. अगर मैं इस से चोदने के लीये कहा तोकहीँ ये जबरदस्ती अपना पूरा का पूरा लंड (पेनिस) एक झटके से ही मेरी चुत में ना घुसा दे नहीं तो मेरी चुत फट जायेगी. मैंने उसे बेड परलिटा दिया और अपने सरे कपडे उतर दिए. वो मेरे गोरे बदन को घूरघूर कर देखने लगा. मैंने उसके बगल में बैठ गयी और उसके लंड (पेनिस)के सुपडे पर अपनी जीभ फीराने लगी. वो जोश में आ कर आहें भरने लगा. थोड़ी देर बाद मैंने उस से पूछा, मेरी चुत को चाटोगेतो उसने अपना सीर हाँ में हीला दिया. मैं उसके ऊपर ६९ की पोसिशनमें लेट गयी और मैंने उसका लंड (पेनिस) अपने मुह में ले कर चूसना शुरूकर दिया. वो अपनी उँगलियों से मेरी क्लिट को मसलते हुये बडे प्यार से मेरी चुत को चाटने लगा. मैं समझ गयी की वो कीसी औरत कोचोदने का पुराना खिलाडी है. थोड़ी देर तक मेरी चुत को चाटने केबाद उसने अपनी बीच की ऊँगली मेरी चुत में घुसा दी और मेरी चुत के G-स्पॉट को रगड़ने लगा. मेरे सारे बदन में आग सी लगने लगी और मैंने उसके लंड (पेनिस) को तेजी के साथ चूसना शुरू कर दिया. वो मेरेG-स्पॉट को रगड़ता रह और मैं जोश से पागल सी होने लगी. फीर २ मिनट में ही मैं झड़ गयी.उसके बाद मैं उसके ऊपर से हट गयी और ढ़ेर सारी क्रीम लाकर उसके लंड (पेनिस) पर लगा दी और थोड़ी क्रीम अपनी चुत में भी लगा ली. क्रीम लगाने के बाद मैं फीर से उसके ऊपर आ गयी. जैसे ही मैंने उसकेलंड (पेनिस) के सुपडे को अपनी चुत की छेद पर रखा तो उसने मेरा सीर पकड़कर अपनी तरफ खीच लीया और बडे प्यार से मुझे चूमने लगा. उसके होठ एक दम गरम थे. मेरे सारे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी.थोड़ी देर तक मैंने अपनी चुत को उसके लंड (पेनिस) के सुपडे पर राग्डा फीरउसके बाद मैंने अपनी चुत को उसके लंड (पेनिस) पर थोडा सा दबा दिया तो मेरेमुह से हलकी सी चीख नीकल गयी और उसके लंड (पेनिस) का सुपडा मेरी चुत में घुस गया. मुझे दर्द होने लगा तो मैंने उसके लंड (पेनिस) का सुपडा अपनीचुत से बाहर नीकल दिया और अपनी चुत को फीर से उसके लंड (पेनिस) पररगड़ना शुरू कर दिया. वो बडे प्यार से मेरी पीठ को सहलाता हुआमुझे चूमने लगा. थोड़ी देर बाद जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो मैंने अपनी चुत को उसके लंड (पेनिस) के सुपडे पर फीर से थोडा सा दबा दिया.उसके लंड (पेनिस) का सुपडा फीर से मेरी चुत में घुस गया लेकिन इस बारमुझे ज्यादा दर्द नहीं हुआ. मैंने अपनी चुत को जैसे ही थोडा सा औरदबाया तो मेरे मुह से चीख नीकल पडी. अब उसका लंड (पेनिस) मेरी चुत में लगभग २” तक घुस चूका था. मेरी टांगें थार-थार कांपने लगी.मेरी धड़कन बहुत तेज चलने लगी. लग रह था की कोई गरम लोहामेरी चुत को चीरता हुआ अन्दर घुस रह हो. मैं रूक गयी.थोड़ी देर बाद मैंने धीरे धीरे अपनी चुत को उसके लंड (पेनिस) पर ऊपर निचे करना शुरू कर दिया. जब मेरा दर्द फीर से कुछ कम हुआ तोमैंने थोडा सा जोर और लगा दिया. मैं फीर से चीख उठी और उसकालंड (पेनिस) मेरी चुत में ३” तक घुस गया. मैंने फीर से अपनी चुत मेंउसके लंड (पेनिस) को धीरे धीरे अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया. थोड़ी देर बाद जब मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो उसने मुझसे लेट जाने काइशारा कीया. मैं जोश से पागल हूई जा रही थी और उसके इशारे केबाद मैं उसके ऊपर से हट गयी और बेड पर लेट गयी. मैंने सोचा अबजो होगा देखा जाएगा. उसने मेरे चुताड के नीचे २ तकिए रख दिए. फीर वो मेरी टांगों के बीच आ गया और उसने मेरी चुत के बीच अपनेलंड (पेनिस) का सुपडा रख दिया और मेरी टांगों को पकड़ कर दूर दूर फैलादिया. आप लोग यह कहानी अन्तर्वासना-स्टोरी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है | मैं दर रही थी की वो कहीँ जबरदस्ती ही अपना पूरा का पूरालंड (पेनिस) मेरी चुत में ना घुसेड दे. उसने धीरे धीरे अपना लंड (पेनिस) मेरी चुत के अन्दर दबाना शुरू कीया. उसका लंड (पेनिस) धीरे धीरे मेरी चुतमें घुसने लगा. जैसे ही उसका लंड (पेनिस) लगभग ४” तक मेरी चुत मेंघुसा तो मैं चीखने लगी और वो रूक गया. उसने अपने होठ मेरेहोंठों पर रख दिए और मेरे बूब्स को मसलते हुये धीरे धीरे अपना लंड (पेनिस) मेरी चुत के अन्दर बाहर करने लगा. अब मैं समझ गयी की वोजबरदस्ती अपना लंड (पेनिस) मेरी चुत में नहीं घुसयेगा.थोड़ी देर बाद जब मैं झड़ गयी तो उसने अपनी स्पीड थोडा तेज कर दी.थोड़ी देर बाद उसने एक हल्का सा धक्का लगा दिया तो मेरे मुह से आह नीकल पडी और उसका लंड (पेनिस) और ज्यादा गह्रायी तक मेरी चुत में घुसगया. वो फीर से धीरे धीरे धक्के लगाने लगा. उसका लंड (पेनिस) अब तकमेरी चुत के अन्दर लगभग ५” तक घुस चूका था. वो मुझे धीरेधीरे चोद्ता रह तो थोड़ी देर बाद मेरा दर्द जता रह और मुझे मज़ा आने लगा.५ मं तक चुदवाने के बाद मैं फीर से झड़ गयी. मेरे झड़ने के बादउसने फीर से अपनी स्पीड बढ़ा दी. मुझे अब बहुत ही मज़ा आ रह था.मैंने अपना चुताड उठाना शुरू कर दिया था. मुझे चुताड उठा उठाकर चुद्वाता हुआ देखकर वो रूक गया और उसने धीरे धीरे अपना लंड (पेनिस) मेरी चुत के अन्दर और ज्यादा गह्रायी तक घुसना शुरू कर दिया. उसकालंड (पेनिस) भौत ही धीरे धीरे मेरी चुत को चीरता हुआ अन्दर घुसता जारह था. जैसे ही उसका लंड (पेनिस) मेरी चुत के अंदर थोडा और घुसा तोमैं फीर से तड़पने लगी लेकिन इस बार मैं चीखी नहीं. दर्द के मारे मैंने अपने होठ जकड लीये. वो अपना लंड (पेनिस) धीरे धीरे मेरी चुतइमं घुसता रह. जब उसका लंड (पेनिस) मेरी चुत में लगभग ७” तक घुसगया तो मैं दर्द से तड़प उठी और मेरे मुह से जोरदार चीख नीकल हीगयी. मेरी चीख निकलते ही वो रूक गया.

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