एक ही साथ कजिन बहन और माँ की ठुकाई


हाय दोस्तों मैं इस साईट रेगुलर रीडर हूँ और मेरे साथ भी कुछ ऐसा हुआ था जिसे मै आप सबसे शेयर करना चाहता हूँ लेकिन नहीं कर पता क्योकि इतनी दरिंग नहीं थी मुझमे लेकिन आज किसी तरह मैंने ठान लिया की मैं अपनी कहानी भी लिख के भेजूं गुरुमस्ताराम डॉट कॉम पर जो की मेरी कहानी प्रकाशित कर आप सभी तक पहुचाये. मेरा नाम मोहन हे और मेरी उम्र 24 साल हे. मुझे सेक्स करन बहुत अच्छा लगता हे. घर में हम पांच मेम्बर्स हे. मैं मेरी माँ, मेरे डेड, छोटी बहन और मेरी एक कजिन जिसका नाम सुरुचि हे वो भी हमारे घर पर रहती हे.

मेरी कजिन पढाई के लिए हमारे शहर में आई थी. और पापा ने उसे हमारे घर में ही रहने के लिए कहा. उसके डेड पापा को खर्चा देते हे क्यूंकि वो नहीं चाहते की उनकी बेटी हमें बोज लगे. मेरी कजिन कुछ 21 की हे और वो देखने में एकदम मस्त माल लगती हे. और मेरी माँ भी कम सेक्सी नहीं हे दोस्तों. वो उम्र में 40 के करीब होने के बावजूद भी एकदम हॉट लगती हे. और सोसायटी के बहुत सब लौंडे मेरी माँ को लाइन मारते हे और उसके बदन के ऊपर गंदे कमेंट्स पास करते हे. माँ का फिगर 36-29-35 है. मम्मी का नाम तो मैंने आप को बताया ही नहीं! उसका नाम मिथिला हे!

एक दिन मेरे पापा किसी बिजनेश डील के लिए कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गए हुए थे. मेरी कजिन सुरुचि को मैंने पटा लिया था और उसे चोदता था मैं अपने घर में ही. और जब पापा नहीं थे तो डेली मैं उसके साथ सम्भोग करता था. पाप को गए एक हफ्ता सा हुआ और मम्मी लोनली फिल करने लगी थी. और वो सुरुचि को अपने पास सोने को बोली. मेरा और सुरुचि का चोदने का कार्यक्रम ठप सा हो गया.

मेरे से सब्र नही हुई और मैंने कजिन से पूछा की अब क्या करेंगे यार? पापा नहीं हे और माँ ने सब काम बिगाड़ दिया. सुरुचि ने कहा अपनी मम्मी को भी साथ में ले लो ना हमारे! और अगर छोटी बहन बोले तो उसे भी लंड दे दो अपना! मैंने कहा मजाक क्यूँ कर रही हो यार.

वो बोली, तुम सेक्स कहानियां नहीं पढ़ते क्या?

मैंने कहा वो कहानियाँ होती हे ना.

सुरुचि बोली, बुध्धू कहानियाना होती हे और हकीकत में भी ऐसा होता हे. गाँव में महेश भाई (उसके बड़े भाई का नाम) भी तो मुझे चोदते हे!

मैंने हंस पड़ा क्यूंकि कजिन ने अपनी एक और चुदाई का इजहार जो किया था. और मुझे ये अच्छा लगा की वो खुद चुदने के लिए उतावली थी. और उसने मुझे प्लान भी बताया. उस दिन से मैं अपनी माँ को अलग नजर से देखने लगा!

माँ को नजदीक से देखा तो मैं मान गया की सोसायटी के लौंडे ठीक ही लाइन देते हे इसे. मेरी माँ के नैन नक्श और लटके झटके देख के किसी का भी लंड खड़ा हो जाए ऐसी ही थी वो. मैंने उस शाम को छत पर अपनी कजिन से कहा की माँ बड़ी सेक्सी हे यार.

वो बोली अगर आंटी साथ में आई तो तुम्हे कोई प्रॉब्लम तो नहीं हे ना?

मैंने कहा माँ बड़ी सीधी हे और वो इसके लिए कभी नहीं मानेगी.

तो सुरुचि ने कहा वो सब तुम छोड़ दो. पहले इतना बताओ की अगर वो आई तो तुम सेक्स करोगे न साथ में मिल के? मैने कहा क्यूँ नहीं भला, करेंगे ना.

सुरुचि ने कहा आंटी को कैसे ले के आना हे वो मेरी टेन्शन हे. और फिर वो हंस के बोली तुम्हारा लंड बड़ा हे सीधी माँ को भी बिगाड़ देगा. और फिर उसने कहा जब चांस मिले तो मम्मी को ये दिखाओ की तुम उसके बदन को लाइक करते हो और बाकी मैं सब देख लुंगी.

मैंने कहा ओके.

फिर मैं मम्मी का ध्यान रक् के बैठने लगा. वो जब नाहा के आती तो मैं उसके बदन को घूरता था. और किचन में वो खाना पका रही हो तो वहां भी घुस जाता था उसे देखने के लिए. मम्मी शोपिंग के लिए कहे तो मैं फट से साथ में चला जाता था. एक दिन शोपिंग में मैंने मम्मी को एकदम टाईट और ऊँची टी-शर्ट दिलवाई. और जब माँ वो ट्राय कर के बहार आई तो उसके पेट को देख के मेरा लंड एकदम कड़ा हो गया.

दुसरे दिन मेरी कजिन सुरुचि ने कहा, तुम यहाँ दरवाजे के पास खड़े रहो और मैं आंटी से जो बात करती हूँ वो सुनो.

मम्मी के पास जा के सुरुचि बोली, अरे आंटी इतनी अकेली सी और खोई हुई क्यूँ लग रही हो?

माँ ने कहा: अरे बेटा क्या करूँ काम कुछ हे नहीं और तेरे अंकल भी इतने दिनों से हे नहीं तो टाइम ही नहीं जाता हे मेरा तो.

सुरुचि: अपनी सहेलियों के पास चली जाया करो ना आंटी.

माँ: अरे बेटा मेरा कोई सहेली या फ्रेंड नहीं हे इस शहर में.

सुरुचि: आप का कोलेज के वक्त का कोई फ्रेंड तो होगा न कोई?

माँ: अरे तब की बात और हे, तब तो हम लोगो का बड़ा सा ग्रुप था और बहुत एन्जॉय करते थे हम.

सुरुचि: कैसे मजे आंटी? गर्लफ्रेंड बॉयफ्रेंड वाले?

माँ ने उसे एक हाथ मारा और बोली, बड़ी बेशर्म हो गई हे तू तो.

सुरुचि: अरे आंटी जी अब मेरे से कैसे शर्माना. आप मुझे अपनी सहेली ही समझो न. मुझे तो आप सब कुछ बोल सकती हो.

माँ: चल भाग तू अपने कमरे में एकदम.

सुरुचि: आंटी आप को एक फ्रेड चाहिए और मैं वही हूँ आप के लिए. आप मुझे सब बता सकती हो.

माँ: हां वो तो हे. बात शेयर करने से मन हल्का हो जाता हे.

सुरुचि: तो फिर बताओ आंटी क्या बात हे आप के मन में?

माँ: ऐसे कुछ खास नहीं, तुम्हारे अंकल नहीं हे इसलिए अकेला अकेला लगता हे.

सुरुचि: तो फिर हम दोनों मिल के कर सकते हे ना?

मम्मी: लेकिन वो कैसे मुमकिन हे?

सुरुचि स्माइल ददे के बोली: कर लेंगे हम!

माँ: कैसे करेंगे?

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